भूलना चाहता हूँ सबकुछ मैं अब,
लेकिन वो दिन फिर याद आ गये।
यारों की महफ़िल की वो रौनकें,
और वो शाम याद आती है अब।
रोज मिलना और घण्टों बैठना,
गली का नुक्कड़ याद आता है अब।
न जाने वो सब कहाँ पर होगें,
लड़कपन के दिन याद आते है अब।
~गोपाल भोजक


भूलना चाहता हूँ सबकुछ मैं अब,
लेकिन वो दिन फिर याद आ गये।
यारों की महफ़िल की वो रौनकें,
और वो शाम याद आती है अब।
रोज मिलना और घण्टों बैठना,
गली का नुक्कड़ याद आता है अब।
न जाने वो सब कहाँ पर होगें,
लड़कपन के दिन याद आते है अब।
~गोपाल भोजक