कुछ गीत नये बन जाते है-
तेरी याद के फूल जब खिलते है,
मन मेरा महक सा जाता है।
जो बुने थे खयाल कभी मैंने,
उन्हें पूरा कर मन चहक जाता है।
अब ऐसा खुमार चढ़ा तेरा,
तन्हाई भी कारवां लगती है।
कभी ऐसी बेखुदी छाती है,
भीड़ भी तन्हा हो जाती है।
मेरे मन के मन्दिर में तुमने,
प्रेम के दीप जला जो दिए।
जब रात घनी अंधेरी हो,
तेरी याद के दीप जलाता हूँ।
हम बून्द बून्द झरे थे तब,
जब पहली बार मिलन हुआ।
उदास दिल ने जब तुम्हे पुकारा,
इक गीत नया बना जाता है।
~गोपाल भोजक


