हम कोरोना झेल रहे है,
वो भाषण बस पेल रहे है।
आक्सीजन मिले न मिले,
टीका महोत्सव मनाना है।
श्मशानों में चिता भरी है,
उनकी रैली मेंभीड़ सजी है ।
सवाल उन्हें कभी न भाये,
मन मे आये वही सुनाये...
~गोपाल भोजक


हम कोरोना झेल रहे है,
वो भाषण बस पेल रहे है।
आक्सीजन मिले न मिले,
टीका महोत्सव मनाना है।
श्मशानों में चिता भरी है,
उनकी रैली मेंभीड़ सजी है ।
सवाल उन्हें कभी न भाये,
मन मे आये वही सुनाये...
~गोपाल भोजक