लग गई नज़र मेरे इश्क़ को ज़माने की,
ज़ख़्म जो भर गये थे फिर से हरे हो गये।
सब तरफ रौनके है महफ़िल भी सजी हुई,
जो मिला था कभी मुझे वो जुदा हो गया।
मैं खुश रहूँ या न रहूँ तू खुश रहे सदा,
जाने क्यों फिर भी तू मुझसे ख़फ़ा हो गया।
©गोपाल भोजक


लग गई नज़र मेरे इश्क़ को ज़माने की,
ज़ख़्म जो भर गये थे फिर से हरे हो गये।
सब तरफ रौनके है महफ़िल भी सजी हुई,
जो मिला था कभी मुझे वो जुदा हो गया।
मैं खुश रहूँ या न रहूँ तू खुश रहे सदा,
जाने क्यों फिर भी तू मुझसे ख़फ़ा हो गया।
©गोपाल भोजक