मेरा सृजन तुम्ही से है,

सृष्टि मेरी तुम्ही ही हो।


मुझ भँवरे का हवा उजाला,

वन उपवन तुम्ही ही हो।


दिनभर तपे हुये तन की,

संध्या रात्रि तुम्ही ही हो।


बिन तेरे मैं कुछ भी नही,

जीवन डोर तुम्ही ही हो।


~गोपाल भोजक