जनमत का फैसला और आस्था आधारित उपकरण ईवीएम...
दुनिया का सबसे तकनीक आधारित आधुनिक देश अमेरिका के हाल ही में चुनाव सम्पन्न हुये, लेकिन किसी मशीन या इलेक्ट्रोनिक्स डिवाइस पर भरोसा न करके हाथ से ठप्पा लगा कर अपना नेत्तित्व चुना ! क्योंकि वहां देश के हर एक नागरिक की संतुष्टि और विश्वास में रखना महत्वपूर्ण है।
विश्व में सौ से भी अधिक देश हैं, जहां लोकतांत्रिक तरीके से अपना नेता चुना जाता है। इनमें से केवल 25 देश ही हैं, जो अपना नेतृत्व चुनने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का इस्तेमाल करते हैं, या फिर पूर्व में कर चुके हैं !
वोटिंग के लिए वर्तमान में भारत में प्रचलित ईवीएम पर ढाई सौ साल पुराने लोकतंत्र अमेरिका जैसे विकसित देशों में लोकप्रिय नहीं है ! और चुनाव के लिए बैलेट पेपर का इस्तेमाल करते हैं !
अमेरिकी चुनाव आयोग के अनुसार रोजमर्रा को हर गतिविधि में इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम इस्तेमान करने वाले देश के नागरिकों को इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम पर भरोसा नहीं !
उस देश के नागरिक मानते हैं कि ईवीएम हैक किया जा सकता है। इसीलिए वो पेपर बैलेट पर ज्यादा भरोसा करते है ! जिसमें उनका वोट वहीं जाता है, जहां वे चाहते है।अमेरिका में सबसे तेज रिजल्ट देना महत्वपूर्ण नही है वहां आखिरी वोट तक इत्मीनान से गिना जाता है। और ईवीएम कितनी तेज है इसका अंदाज़ा कल देर रात्रि तक घोषित हुये बिहार चुनाव नतीजों से लगाया जा सकता है।
पश्चिम के उस छोर से पूर्व के इस छोर तक हालात बिल्कुल बदल जाते है, दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को भारत में तकनीक प्रेम का तमाशा बनाया जा रहाा है ! जनसुविधाओं के लिए दूसरे देेेश की आउटडेटेड तकनीकी का सहारा लेेंके वालेे हम वोटिंग में स्पेस एज टेक्नोलॉजी का दिखावा कर रहे हैै ! इलेक्ट्रोनिक्स का जिक्र संविधान में कहीं नही है, न ही ये प्रक्रिया संसद, कानून या विधि द्वारा स्थापित है !
इलेक्टॉनिक वोटिंग मशीन एक इलेक्शन कमिश्नर द्वारा की गई एक पहल मात्र है। जो एक नौकरशाह मात्र है। ये भी सही है कि आज से 20 साल पहले जब ईवीएम का उपयोग शुरू हुआ तब किसी को इस पर कोई संदेह नही था, लेकिन आज जब ईवीएम पर हजारों सवाल उठ रहे है उंसके पीछे बीस बरसों में तकनीक में ख़फ़ी बदलाव हुये है।
ईवीएम सही है या नही इसे टेम्पर किया जा सकता है या नही इस तकनीक के बारे में मुझे कुछ नही मालूम, ये कोडिंग सॉफ्टवेयर और कम्प्यूटर हार्डवेयर के विशेषज्ञ जाने। लोकतंत्र में प्रत्येक मतदाता को विश्वास होना जरूरी है कि उसने जिसको वोट दिया है, वो उसी के हिस्से में गिना गया है। मतदान और मतगणना पूरी तरहां से पारदर्शी होनी चाहिये। और ईवीएम चुनाव की एक अपारदर्शी प्रक्रिया है। ऐसे में इस सिस्टम का इस्तेमाल लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया में होना सही नही है। बैलेट पेपर में आप अपने हाथ से व्यक्ति विशेष के लिए ठप्पा लगाते है और आब्जर्वर के सामने एक एक मतपत्र खोल कर गिना जाता है, वही ईवीएम आपके सामने सीधे एक बल्क गिनती रखती है ! आप, मैं और कोई और जो गिनती कर अथवा करवा रहा है उंसके चिप में झांक नही सकते है।
हमे तो इस थोपे गये इलेक्ट्रॉनिक और कथित पवित्र डिवाइस पर मात्र भरोसा करना होता है ! क्या कभी जनमत के फैसले आस्था पर आधारित हो सकते है?
ऊपर से पुनः जांच में भी मात्र 5 फीसदी विविपैट ही रेंडमली चैक किंये जाने का नियम है।
मेरी नजर में लोकतंत्र की प्रकिया को तकनीक का शोकेस बनाने की बजाय हमारे अन्य कामो की तरहां सशरीर होनी चाहिए।


