अब न सही जाती ये जुदाई,
दिल को बहुत तड़फ़ाती जुदाई।
बिन तेरे कैसे जीये हम,
काटे नही कटती ये जुदाई।
सूख रहा है इश्क का दरिया,
मिलन की प्यास बढ़ाती जुदाई।
तेरे बिन अब रहा न जाये,
दिल पे तीखा खंजर जुदाई।
अपनी सुद बुध खो बैठे है,
इश्क का मुश्किल इम्तेहान जुदाई


