“मैंने उसकी शहरग पर छुरी रखी, हौले-हौले फेरी और उसको हलाल कर दिया.” “यह तुमने क्या किया?” “क्यों?” “इसको हलाल क्यों किया?” "मज़ा आता है इस तरह." “मज़ा आता है के बच्चे, तुझे झटका करना चाहिए था,इस तरह.” और हलाल करनेवाले की गर्दन का झटका हो गया.

सहादत हसन #मंटो का दिन

#11मई1912