जो भी है गलत है शिकायत है उनकी,

एक उनकी यही बात मुसीबत है मेरी।


इस दिल के ज़ख्मों का कोई ईलाज नहीं,

लगता है अब मुझे नाकाम ज़िंदगी है मेरी।


दिल भर गया है दुनियां के तमाशों से,

सहरा में जाने की अब नीयत है मेरी।©गोपाल भोजक।