मैं चाहता था पाषाण बनूं,आंधी में मुझे हिला न सके,तेरे आँख के निर्मल आंसूं ने,मेरे जीवन को झकझोर दिया।
मैं चाहता था पाषाण बनूं,आंधी में मुझे हिला न सके,
तेरे आँख के निर्मल आंसूं ने,मेरे जीवन को झकझोर दिया।