यू तो उसका व्यक्तित्व उसका बदन बेहद आकर्षक था, लेकिन मुझे उसकी आँखें बहुत पसंद थी।
उसकी आँखें बिल्कुल ऐसी ही थीं जैसे कोई हिरणी खड़ी हो,
उसके पूरे जिस्म में अगर सबसे पहले कोई चीज आकर्षित करती है तो वो उसकी आँखें।
यूं कह सकते है कि बहुत ही ख़ूबसूरत आँखें थीं, जिनको मैं कोई उपमा नही दे सकता, मुझमें ख़ूबसूरती और बदसूरती की तुलना करने की तमीज़ है, लेकिन इन आँखों के मामले में सिर्फ़ इतना ही कह सकता हूँ कि वो बेहद ख़ूबसूरत है...
उन आँखों मे बेपनाह नशा था, कशिश थी।
मेरी उन आँखों से पहली मुलाक़ात बहुत बरस पहले करीब 20 साल पहले हुई थी।
मैं उन आँखों का ज़िक्र कर रहा हूँ जो मुझे बेहद पसंद है। जब मैंने उसको पहली बार देखा तो सबसे पहले मुझे उसकी आँखों ने ही अपनी तरफ़ आकर्षित किया था। ये आंखे जो न बड़ी थीं, न छोटी, नीली थीं, न भूरी, न काली थीं बस एक अजीब क़िस्म का आकर्षण था इन आँखों मे जिन्हें देख कर मेरे क़दम रुक गए थे...और दिल उन्ही आंखों में अटक कर रह गया था।
बरसो बरस उन आंखों को पाने की तमन्ना लिए जीने के बाद एक रोज मुझे वो आँखे मिली और मेरी हो गई...


