कुछ अधूरे ख्वाब मेरे सिरहाने पड़े है,
नींद क्यों रात भर आती नही मुझको।
आँखों के दर्पण में तेरी तस्वीर बनी है,
तू कही भी रहे ओझल नही होती।
तुमसे मिल कर मैं संवर जाता हूँ,
वरना तेरी याद पागल बना देती।
~गोपाल भोजक


कुछ अधूरे ख्वाब मेरे सिरहाने पड़े है,
नींद क्यों रात भर आती नही मुझको।
आँखों के दर्पण में तेरी तस्वीर बनी है,
तू कही भी रहे ओझल नही होती।
तुमसे मिल कर मैं संवर जाता हूँ,
वरना तेरी याद पागल बना देती।
~गोपाल भोजक