बेरुखी कर के तुम मुझे छोड़ गई,
तुम्ही कहो तुम्हे कैसे मनाया जाए।
जब भी कभी तुम मुझे देखती होगी,
वो गुज़रे ज़माने याद आते तो होगें।
आ भी जा इक बार लौट के जान,
हम तेरे इंतज़ार में पलके बिछाए बैठे।
तेरी यादों के आंसू भी अब सूख गये,
इन पलकों की नमी लौटाने आजा।
©गोपाल भोजक


