दिनों बाद चांद को साफ़-साफ़ देखा,
या देखा मैंने कल की चिलचिलाती धूप??
तारों को आज फिर टिमटिमते देखा,
या देखा बदन को जलाती धूप??
देखा मैंने मेरा सुकून,,
ठंडी हवा,पसीने की बूंदों से टकराती, बर्फ सी बन जाती,
मेरा किराए का एकतरफा खुला सा छत,
बिछा चारपाई, कथरी डाल, लगा मच्छरदानी,
हवा को चेहरे पर महसूस करता,
फिर,,देखता मैं चमकता पूरा चांद,,चमकता चांद,,
या,, देखता मैं कल का जलता गगन??
चिलचिलाती, जलाती, झुलसाती धूप,
बहती, तड़पाती, दम घोंट देती लूह,
बैठा गद्दे वाली कुर्सी पर, लिखता,,
पंखे से लूह खाता,मेरे उपर के की किराए के डिब्बे में,,
फिर वापस आता,,
देखता मैं चमकता चांद,
देखता,क्या ना करता??
निसर्ग की बारिश झेला, अब छणिक खुशी मानता,
देखता मैं चमकता चांद,
दिनों बाद, सुकून की मैं नींद पाता,
देखता मैं चमकता चांद।


