उल्लास से जियो ज़िन्दगी ----------------------------
अभी चाहतों की उड़ान बाँकी है
तेरे सफ़र की दास्तान बाँकी है
हवा का झौंका नहीं कि यूँ निकल जाये
तेरे रूह की पहचान बाँकी है ----
तनहा बेबस ना समझ खुद को
तेरे अंदर का इंसान बाँकी है
सतह का शांत सागर है तू
मगर भीतर घमासान बाँकी है ----
मेरे जज्बातों की ओट थाम, चल तो सही
तेरे दिल का मेहमान बाँकी है
ना दे ये जमीं साथ, ना सही
अभी आसमान बाँकी है ----
जी ले ज़िन्दगी को हर पल मुस्करा के
अभी इम्तहान बाँकी है
मंज़िलों को ना गिन, चल तो सही
अभी आराम बाँकी है ----
सफ़र का नाम ही तो है ज़िन्दगी
उसका फ़रमान बाँकी है
सभी को ख़ाक हो जाना है एक दिन
अभी शमशान बाँकी है ----
(डा. गोपाल सिंह मेहता )
