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रेखा


तेरे हाथों की रेखा , रेखा से मिलती हैमेंहदी की बनावट , बनावट राधा से मिलती हैदेख कर यूंही , अकेला हो मंद मुस्कुरा लेते हैकरके गम , मन नम्र अकेला इतरा लिया करते हैं

••••गुडलक

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