फूलों सा बदन जिनकेकाटे है जुबानों पेकही आग न लगा जाएबर्फीली चट्टानों पे ।।••••गुडलक
फूलों सा बदन जिनकेकाटे है जुबानों पे
कही आग न लगा जाएबर्फीली चट्टानों पे ।।••••गुडलक