यूंही अकेला, पथ पर पाठ पढ़ रहाएक नदी है जिसमे पानी है चलताजैसे भाव हो रेगिस्तान केबावला हो उठा देख उसे मैं
यूंही अकेला, पथ पर पाठ पढ़ रहाएक नदी है जिसमे पानी है चलता
जैसे भाव हो रेगिस्तान केबावला हो उठा देख उसे मैं