चांदनी के झूले में
रात अधेरों में सांस लेती है
अजनबी आवाजें
सुन रहा हूं जादू सा
रेल की पहियों से
सुन रहा हूं लोरिया
एक अजनबी बस्ती में
मेरे घर का है दरवाजा
मेरे घर के खेतों में
पहरेदारी लग गई है
इक प्यारी सी परी बनकर , मुस्कुराहटें थम गई हैं
••••गुडलक
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