उड़ रहे अनेको खग नभ मे,
कुछ तीव्र गति कुछ मंद चाल मे,
कुछ धैर्य रूप कुछ हलचल मे,
उड़ रहे अनेको खग नभ मे।।
एक पंथी है जो भटका था कामयाबी की राहो से,
मिल गया मार्गदर्शन उसको भी उन्ही बेजान किताबों से, जिन पन्नों पर लिखे है समृद्ध सभी किस्मत को अपने,
हासिल कर लेगा अब वह भी कामयाबी की चाभी को अपने।
बनेगा सूरज वह चमकेगा,
जीतेगा फिर वह बाजी को।
तुम पड़े रहो बस आलस मे ,
उड़ रहे अनेको खग नभ मे।।


