उनसे कह न पाए, सोचते रहे यह जज़्बात-ए-इश्क़ नहीं हवस है,
उनके जाने के साथ, चलो मेरी यह ग़लतफहमी तो गयी!
उनको उम्मीद थी कि हम कुछ कहेंगे, हमको उम्मीद थी कि वो कुछ कहेंगे,
उनकी उम्मीद के साथ, चलो मेरी यह ग़लतफहमी तो गयी!
अब जो जज़्बात का एहसास हुआ, क्या कहुँ क्या मांगू क्या चाहूँ क्या सोचूँ ,
मेरी तमन्नाओं के साथ, चलो मेरी यह ग़लतफहमी तो गयी!
खुद को भूलना आसान लगता है, उनको भूलना मुमकिन नहीं,
इस भूल के साथ, चलो मेरी यह ग़लतफहमी तो गयी!
दुआ है कि वो वापिस आये तो उनसे इज़हार-ए-इश्क़ करूँ,
मेरी यह दुआ क़ुबूल होगी, चलो मेरी यह ग़लतफहमी तो गयी!