शमशान भी तो है इक मन्दिर, यहाँ मृत्यु का उत्सव होता है
छिटके जो जीवन कालों से, यहाँ शान से रूख्सत होता है
शमशान भी तो है इक मन्दिर, यहाँ मृत्यु का उत्सव होता है
है धाम बड़ा ये मंत्रों का, क्रीड़ा का भी और तंत्रों का
जीवन का अंतिम लक्ष्य भेद, है अंत विचार मतभेदों का
यह अंत ही तो शुभ आंरभ है, यही समझना बाक़ी है
जो राख़ धरा में धूल बने, यह सत्य समझना काफ़ी है
हाँ जगह ही ये कुछ ऐसी है, सब द्वार पे इसके आते हैं
ना साम दाम, ना दंड भेद, कुछ चिन्ह ही ले जा पाते हैं
तो क्युं डरना , जब मरना है
ये तो तक़दीर का खेला है,
क्या हुॅ मैं और क्या तुम हो
आवन जावन का रेला है
अब आओ चलें इक नयी डगर, के प्रेमराग है सीख लिया
बस मूॅद के ऑखे अब अपनी, तारे बनने मैं निकल लिया
ये सत्य सनातन है प्यारे, उद्धार इसी से होता है
सालों से पालित मलिन देह का लगे आग में गोता है
शमशान भी तो है इक मन्दिर, यहाँ मृत्यु का उत्सव होता है
छिटके जो जीवन कालों से, यहाँ शान से रूख्सत होता है
शमशान भी तो है इक मन्दिर, यहाँ मृत्यु का उत्सव होता है


