Poetry 1 min read 782K reads

Banaras


हाथ में कुल्हाड़ वाली चाय लियेबैठे जो सुकून से दशाश्वमेध घाट पे

बनारस की गलियों में घूमता ये मनठहर गया हो बचपन की यादों में जैसे वक्त

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