हाथ में कुल्हाड़ वाली चाय लियेबैठे जो सुकून से दशाश्वमेध घाट पेबनारस की गलियों में घूमता ये मनठहर गया हो बचपन की यादों में जैसे वक्त
हाथ में कुल्हाड़ वाली चाय लियेबैठे जो सुकून से दशाश्वमेध घाट पे
बनारस की गलियों में घूमता ये मनठहर गया हो बचपन की यादों में जैसे वक्त