ये चाँद चमकता भी तो सूरज से ही है,
चाँदनी भी तो सूरज की ही है रौशनी।
सूरज न होता तो न होते कभी दिन रात,
सूरज से ही तो है ये खूबसूरत सी ज़मी।
चाँद की तुलना न सूरज से हो सकती है,
न सूरज के बिना चांद का है कोई वजूद ।
फ़र्क ज्यादा कुछ नहीं है,दोनों हैं एक ही,
चाहे सूरज को अर्घ्य दो चाहे चाँद को पूज।
भेद बाहरी हैं, भीतर में सबके एक नूर,
एक नौकर है एक में मालिक का गरूर।


