समय
सही और गलत के दायरे से
मुक्त हो गया है
अच्छे और बुरे की पहचान
नहीं कर पा रहा है
समय असमय आ गया है
सबको सबक सिखाने
बलवान और बेरहम बनकर
समय बदल रहा है
अपनी चाल-ढाल
अपनी फितरत भी
किसी को नई बख्श रहा है
लग रहा है जैसे
हलाल कर रहा है
और बिगड़ैल साँड़ सा
भटक रहा है समय
हे प्रभु!
इस समय की नाक में
नकेल कसो
इसे सही दिशा में ले जाओ...


