नेताजी
कल के नेताजी में
और आज के नेता में
एक फ़र्क साफ है
जो नेताजी थे वे
कुर्सी के लिए नहीं
देश के लिए जिये
देश पर ही मर मिटे
जो आज के नेता हैं
वे कुर्सी के लिए जीते हैं
और कुर्सी के लिए ही मरते भी हैं
शायद इसीलिए वे
नेता कहे जाते हैं
और अब के नेता 'जी' के योग्य
बन ही नहीं पाते हैं
