एक शहीद की लोहड़ी
खेतों में जब
रंग बसंती लहराता
खलिहानों में फसलों का
अम्बार लग जाता
मौसम का मिज़ाज जब
ठंडा पड़ जाता
दूध ,मलाई मक्खन से
तन,मन तर जाता
दिल में मिलन की मस्ती की
कोई याद दिलाता
लोहड़ी में घर आ जाओ
जब यह ख़त आता
तब सचमुच यह त्योहार
मुझे गाँव ले जाता
सीमा पर बंदूकें ताने
मैं भंगड़ा पाता
यारों के संग लोहड़ी के
गीता खूब गाता
जय-जय लोहड़ी
जय भारत माता
जय भारत माता
गीता टंडन
14.01.21
