कंकड़-कंकड़ जोड़कर बन जाए पहाड़।
कण-कण में भी बसा ताड़ सके तो ताड़।।
कदम-कदम चलकर ही मंज़िल होती पास।
लम्बा रास्ता देखकर मत हो जाना उदास।।
फूल-फूल से रस लेकर आती है मधुमक्खी।
कभी न माने हार वह, धुन की अपनी पक्की।।
नन्हें-नन्हें तारों से जब भर जाता आकाश।
अमावस की रात को भी बना देता है ख़ास।।
एकदम नन्हा सा बीज भी बन जाता बड़ा वृक्ष।
न मानो किसी को छोटा और न समझो तुच्छ।।


