आराम फ़रमाते हैं
चलो कुछ सपने बुलाते हैं
किसी भूले -बिसरे यार को
यादों के सहारे चाय पर बुलाते हैं
बातों के सिरहाने बैठकर
किसी अनजाने ख्व़ाब से
गप्पे लड़ाते हैं
चलो इतवार मनाते हैं |
घड़ी की सूइयों को
कुछ घड़ी को अकेला छोड़कर
प्रेस किए हुए कपड़ों को
आलमारी में भूलकर
जिम्मेदारियों से थोड़ा
मुँह मोड़कर
अलार्म घड़ी को चिढ़ाते हैं
चलो इतवार मनाते हैं |
आज नींद के साथ थोड़ा
और वक्त गुज़ारते हैं
अलसाए पलों को थोड़ा
हौले से जगाते हैं
जिस्म को अँगड़ाईयों से
खुलकर खिलाते हैं
नाश्ते में आज कुछ
मज़ेदार बनाते हैं
चलो इतवार मनाते हैं
हफ़्ते भर से बेतरतीब
पड़ी चीज़ों को आज
करीने से लगाते हैं
किसी अपने को दोपहर के
खाने पर बुलाते हैं
शाम को किसी नुक्कड़ पर
दोस्तों के साथ चाट खाते हैं
घर के लिए ज़रूरत का
सामान जुटाते हैं
अपने घर को आज
अपना बनाते हैं
चलो इतवार मनाते हैं
