छब्बीस जनवरी 2021
गणतन्त्र हिल गया
गणों ने देश को घायल किया
रौंद डाले राजपथ
तोड़कर लोकतंत्र के उसूल
पहचानने में कर दी भूल
खुद को ख़ुदा समझकर
मातृभूमि को छलकर
तिरंगे को उतार फेंककर
माँ को कर दिया बेइज्जत
और शर्मिंदा भी |
भला कोई बेटा
अपनी माँ की छाती से
उसका आँचल उतारकर
फेंक सकता है ?
और अगर बेटा यह भी
कर गुज़रने पर अमादा है
इसका मतलब है कि
या तो माँ ने उसकी गलतियों पर
हमेशा उसे माफ़ कर दिया है
या माँ की शक्ति
ख़त्म हो चुकी है !
हे माँ !
अब जागो !
और अपनी ही गोद में पलनेवाले
दुष्टों का संहार करो ...


