(गीतिका)

बैठ जाएं आज रिक्सा में चलो दोनों वहाँ।

है गया स्वामी कहीं रिक्सा खड़ा ख़ाली यहाँ।

लाल प्यारी सीट देखो मोहती मेरा जिया।

हाथ थामे जा चढ़े, बैठे, हुआ राजी हिया।।


स्वर्ग में भी क्या मिलेगी मौज ऐसी पा रहे।

मुस्कुराते चेहरे सन्देश ये फैला रहे।

है नहीं पैसा ख़ुशी का उत्स सारे जान लो।

है कहीं पैठी तुम्हारे ही दिलों में मान लो।।

गंगा धर शर्मा 'हिन्दुस्तान'

अजमेर (राज.)