
वह भी तो इंसान ही है
सृष्टि के बीजों को
मेहनत की खाद से
सींचकर पसीने के पानी से
बोता है फसल सृष्टि के सपनों की
सृष्टि की संतानों के लिए
कुछ उम्मीदों को पालकर
कि जब मेहनत को काटेगा
तो भाग्य की फसल तैयार होगी
पर वह बाजार
उ
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