
नारी है सृष्टि का विकास
आधार जगत का, है प्रकाश
ईश्वर भी पूर्ण नहीं होता
नारी का संग नहीं होता
जैसे सीता बिन राम नहीं
राधा के बिन घनश्याम नहीं
तुम वीरों का उत्थान भी हो
खुद वीर भी हो, खुद मान भी हो
राधा का निश्चल प्रेम भी हो
मीराबाई का गान भी हो
माँ की ममता, माँ की समता
माँ का पावन बलिदान भी हो
तुम युद्ध भी हो तुम क्रुद्ध भी हो
तुम सबसे अधिक प्रबुद्ध भी हो
तुम दुर्गा हो तुम काली हो
तुम सृष्टि की रखवाली हो
लक्ष्मीबाई का शौर्य भी हो
सृष्टि का अंतिम छोर भी हो
तुम दुल्हन का श्रृंगार भी हो
रिश्तों का हर आधार भी हो
तुम पत्नी हो तुम पुत्री हो
तुम बहन और कवयित्री हो
तुम त्याग भी हो सौभाग्य भी हो
तुम जीवन का अनुराग भी हो
मीराबाई की भक्ति भी हो
दुर्गा माता की शक्ति भी हो
तुम वीणा की झंकार और
तुम मोहयुक्त अनुरक्ति भी हो
तुम ज्ञ
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