चलते चलते पाँव मेरे
थक गये हैं
वक्त के नासूर भी अब
पक गये हैं
पर तुझे तो खोजना है
तू कहाँ है?
रात की आराधना कर
तिमिर भी अब थक गया है
और यह घनघोर बादल
बरसकर अब थम गया है
पर तुझे तो खोजना है
तू कहाँ है?
रास्ते भी थक रहे हैं
पथ निरंतर तप रहे हैं
मंजिलों से दूर हूँ मैं
वक्त से मजबूर हूँ मैं
पर तुझे तो खोजना है
तू कहाँ है?
झलक बस देखी है तेरी
तू सभी में बस रहा है
मेरी नादाँ हरकतों पर
तू कहाँ से हँस रहा है
पर तुझे तो खोजना है
तू कहाँ है?
मंदिरों से लौट आया
बस्तियों में फिर रहा हूँ
रास्तों की ठोकरों से
अनवरत् मैं गिर रहा हूँ
पर तुझे तो खोजना है
तू कहाँ है?
निर्धनों का भाग्य तू है
वीर का अनुराग तू है
रास्तों की छांव तू है
मेरे तन का घाव तू है
पर तुझे तो खोजना है
तू कहाँ है?
हैं तेरे ही नाम कितने
हैं तेरे ही काम कितने
सूरतें तेरी हजारों
हैं तेरे ही राज कितने
पर तुझे तो खोजना है
तू कहाँ है?
तू गरीबों की दुआ है
क्षितिज का विस्तार तू है
तू कभी माँ का ह्रदय और
गगन का आकार तू है
पर तुझे तो खोजना है
तू कहाँ है?
ज्ञात है घट घट बसा है
पर मेरा मैं भी तो तू है
सब अगर तू ही तो तू है
तब तो मैं भी सिर्फ तू है
फिर भी तुझको खोजना है
तू कहाँ है?
~गौतम @gautam0112
