गर्जन घनघोर घनन घन घन

उत्तुंग शिखर डगमग डगमग

चपला कड़के कड़ कड़ कड़ कड़

कलुषित निशिचर कल कल कल कल

चहुँ ओर विहग चहके चहँ चहँ

मन सिहर उठे बहके रह रह

दिनकर चमके जगमग जगमग

कांपें धरती डगमग डगमग

जब पवन बहे वह सनन सनन

वह प्रेम पले फिर मगन मगन

तब अगन जले फिर धधक धधक

दावानल भड़के भड़क भड़क 

सृष्टि सरके सर सर सर सर

वृष्टि बरसे खर खर खर खर

सरिता बहती कल कल कल कल 

और घड़ी बढ़े पल पल पल पल

पायल छनके छन छन छन छन

कंगन खनके खन खन खन खन

शिव का डमरू डम डम डम डम

तब सृष्टि कहे बम बम बम बम


~गौतम ✍️ @gautam0112