
शरीर हमारी पहचान ही तो है
बसा रखा है जिसने
अंतर में एक कोमल
आत्मा
और बसते हैं उसमें
सुंदर से भाव
इन भावों के लिबास को ओढ़े
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शरीर हमारी पहचान ही तो है
बसा रखा है जिसने
अंतर में एक कोमल
आत्मा
और बसते हैं उसमें
सुंदर से भाव
इन भावों के लिबास को ओढ़े