शरीर हमारी पहचान ही तो है

बसा रखा है जिसने 

अंतर में एक कोमल 

आत्मा

और बसते हैं उसमें 

सुंदर से भाव

इन भावों के लिबास को ओढ़े 

चमक रही हो

जैसे रश्मियों के पड़ने से

जल चमकता है

इसी सूरत को मैंने

ह्रदय में बसा रखा है

और सौंप दिया है तुमको


~गौतम @gautam0112