नीला आसमान
नीला आसमान कितना विस्तृत है न
कल्पनाओं से परे
वृहद कैनवास सा
कैसी अनोखी चित्रकारी
सूर्य,चंद्र और तारे
प्रदर्शनी ऐसी कि सब शामिल उसमें
नीला आसमान
किसी पुस्तक सा भी
सृष्टि के हर अध्याय को समेटे
हर परिवर्तन का साक्षी
जो आकाश देता है पंखो को
उन्मुक्त विहग के सदृश
कभी परियाँ ढूँढूं दादी की कहानियों वाली
कभी उड़ते अश्वों पर सवार
अप्सराएँ ढूँढूं
कभी रुई से उड़ते उजले बादल
खुश हो लूँ देखकर
कभी उन्मुक्त गौरैया कभी विहगों को
गिनूँ
कहीं तुम्हारा भी अक्स देखूँ
मुस्कुराता सा, शर्माता सा
और कहीं इसके सजीले कैनवास पर
मुग्ध होकर ढूंढता फिरूं
तस्वीर अपनी
~गौतम @gautam0112


