चमक उठो इस वृहद गगन में
सूरज की लाली बनकर
शैतानों पर टूट पड़ो
खप्पर वाली काली बनकर
नारी तुम कमजोर नहीं हो
यह संसार तुम्हारा है
सदियों से उद्दीप्त गगन में
यह विस्तार तुम्हारा है
भूल गयी तुम मुक्त शेरनी
हो इस सकल धरातल की
और शक्तियाँ निहित तुम्ही में
देवी हो इस भूतल की
अभिमानी, अत्याचारी
शैतानों पर ऐसे गरजो
चपला बनकर गाज गिरा दो
और मेघ से यूँ कड़को
तुम ही हो झाँसी की रानी
पद्मावत की गाथा हो
ऐसा कोई शिखर नहीं है
जिस पर चढ़ा न जाता हो
नारी तुम कमजोर नहीं हो
कूद पड़ो दुर्गा बनकर
महिषासुर का नाश करो
तुम आदिशक्ति अम्बा बनकर!!
~गौतम


