कैसा गूढ़ आचरण देखा
देवी तुल्य खींच कर रेखा
पूज रहे हैं मंदिर मंदिर
ऐसी है इनकी मन रेखा
पर यह देवी किसी मोड़ पर
झेल रही है घोर यातना
बुरी दृष्टि, लालच, हिंसा और
भेदभाव, हर पल प्रताड़ना
यह मुझको स्वीकार नहीं है
बंद करो, अब रहने दो
नारी हूँ भगवान नहीं हूँ
मुझको नारी रहने दो!!!
~गौतम


