भीनी भीनी, सौंधी सौंधी 

प्राणों से भी प्यारी हूँ

अगणित बलिदानों से सिंचित

मैं भारत की माटी हूँ 


लेह, सियाचिन और कारगिल 

या झाँसी या राजस्थान 

पानीपत या अवध और

या पूरा कह लो हिन्दुस्तान 

अगणित वीरों की जननी हूँ 

अविरल सिंधू घाटी हूँ 

मैं भारत की माटी हूँ 


भगत सिंह की क्रांति और

राणा प्रताप का साहस देखा

जलती पदमिनियां भी देखी

और सिमटता आंगन देखा

राम राज्य का वैभव और

भोले शंकर का तांडव देखा

देखी मीरा की भक्ति और

विवश खड़ा वह पांडव देखा

बंजर भुमि और अविरल 

सरिता की निर्मल धारा देखी

नीति-धर्म का सुखद और

विस्तृत उत्कृष्ट समागम देखा

नारी का उत्थान और

उनके वैभव का प्रांगण देखा

कहीं नारियों की पीड़ा और 

कहीं सिसकता आंगन देखा

हर्षित भी हूँ गर्वित भी हूँ 

पावन हल्दीघाटी हूँ 


मैं भारत की माटी हूँ

कितने वीर सपूतों को

मेरी खातिर मिटते देखा

देखी आजादी की बेला

और शाम ढलते देखा

ज्ञान और विज्ञान और

बढ़ता प्यारा भारत देखा

लेकिन फिर भी लाचारी और

भूखा प्यासा बचपन देखा

देखी सूनी उम्मीदें और

सूना माँ का आंचल देखा

अच्छी , सच्ची और झूठ की

दबी हुयी परिपाटी हूँ 

मैं भारत की माटी हूँ 

~गौतम