किसको मैं धर्मशील समझूं 

किसको मैं बलशाली मानूँ 

किसको मैं प्रखर धनुर्धारी

किसको मैं न्यायशील मानूँ 

जब भरी सभा में नारी की

मर्यादा भंग हो रही थी

जब अबला सी द्रौपदी वहां

अपना सम्मान खो रही थी

तब भरी सभा मे वासुदेव

नारी रक्षा हित आते हैं 

वीरों से सज्जित प्रांगण में 

नारी की लाज बचाते हैं

~गौतम