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झांसी की रानी- युद्ध का चित्रण

झांसी घेर खड़ा शत्रु था

मचा हुआ था हाहाकार 

साध अश्व को, साध पुत्र को

साध शत्रु को, कर ललकार 

कभी अश्व को साध रही थी

साध रही थी आंधी को

सधे नेत्र थे, सधे पांव थे

सधी हुयी रानी की चाल

सधी कटार, सधी तलवारें 

सधा हुआ प्रत्येक प्रहार

सधा हुआ वह अश्व निडर

रानी को साध रहा हर बार

कूद पड़ी थी दुर्गा बनकर

लेकर काली का अवतार

सधी दामिनी कड़क रही थी

सधे मेघ की प्रलयंकार

सधा काल, साधे धरती को

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