
निशा अंधेरी और तिमिर तुम
आंधी-तूफाँ लाख चलाओ
और गगन से कितने ही
अनगिनत बार ओले बरसाओ
दिनकर के आने तक मुझको
इसी राह पर चलना है
दीपक हूँ मैं हर कीमत पर
जलना है तो जलना है
मिले यातना बारी बारी
नहीं बुझेगी ये चिंगारी
कितने लाख प्रलोभन दे लो
भले मेरा तुम रग-रग ले लो
इस निस्तब्ध निश
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