मेरी कलम ने... 

जब दुख देखा, दुखी हो गयी

जब जुल्म देखा, बागी हो गयी

जब श्रृंगार देखा, दीवानी हो गयी

जब चाँद देखा, रूमानी हो गयी

जब भ्रष्टाचार देखा, विरोधी हो गयी

जब अत्याचार देखा, क्रांतिकारी हो गयी

और जब शहीद देखा, नम हो गयी, निःशब्द हो गयी!!!! 

       ~गौतम