वही दरिया बनो गर तुम
तो लहरों में तुम्हें भर लूँ
सुना दूँ गीत फिर कोई
तेरी आंखों में यूँ बस लूँ
मुझे मालूम है तू ही
पहाड़ों से निकल आयी
बहे जब अश्रु आंखों से
नदी बनकर तू बह आयी
घाट बनकर बनारस का
तुझे बांहों में मैं भर लूँ
शाम की आरती बनकर
इबादत मैं तेरी कर लूँ
~गौतम @gautam0112


