घूँघट
लाज का, शर्म का, इज्जत का
शायद अनंत संवेदनाएं
अनंत आँसू
अनंत खुशियाँ
मोहनी मुस्कान
लिए फिरती है स्त्री
पर कोई मोल नहीं इन भावों का
जो पनपते हैं घूँघट में
और यहीं विलीन हो जाते हैं
~गौतम


घूँघट
लाज का, शर्म का, इज्जत का
शायद अनंत संवेदनाएं
अनंत आँसू
अनंत खुशियाँ
मोहनी मुस्कान
लिए फिरती है स्त्री
पर कोई मोल नहीं इन भावों का
जो पनपते हैं घूँघट में
और यहीं विलीन हो जाते हैं
~गौतम