घोर तिमिर है चौबारे में 

आओ थोड़े दीये जलायें

धीरे धीरे

मन थोड़ा निस्तब्ध पड़ा है

बच्चा बनकर खेलें, गाएं 

धीरे धीरे

अब तक भले शहर जलता हो

आओ भड़की आग बुझायें

धीरे धीरे

सबकी चेतना शिथिल पड़ी है

आओ उसका साथ निभायें

धीरे धीरे 

बढ़ते घोर अनाचारों को

आओ आकर दूर भगायें

धीरे धीरे 

चारों तरफ न्याय पीड़ित है

आओ उसको न्याय दिलायें

धीरे धीरे 

जिधर गलत होता देखें 

उसके विरुद्ध आवाज उठायें

धीरे धीरे 

~गौतम @gautam0112