माना कि सफर लंबा है
पथरीली राह सही
एक कदम संग मेरे
चलो तो सही
माना कि खौफ कम नहीं
भेड़िये चहुँ ओर हैं
ऐतबार कर संग मेरे
बढ़ो तो सही
माना कि अंधेरा गहरा है
मेरी आँखें मशाल बन जलेंगी
मेरी आँखों पर विश्वास कर
चलो तो सही
माना कि तुम सावित्री नहीं
और मैं सत्यवान नहीं
एक बार यमराज से
लड़ो तो सही
माना कि अकाल है
बारिश के आसार नहीं
एक बार बीज बन
उगो तो सही
माना कि सब सो रहे
शहर की परवाह नहीं
एक बार चौकीदार बन
जगो तो सही
माना कि अनाचार है
असत्य है, अन्याय है
एक बार अनशन तुम
करो तो सही
माना कि व्यवस्था बहरी है
और कानून अंधा है
एक बार आवाज
करो तो सही
~गौतम @gautam0112


