ब्रह्मांड 

शून्य से शाश्वत तक

गीता से भागवत तक

यह शून्य जब विस्तार ले

नश्वर और अनश्वर 

हम होते हैं निराकार से साकार

और पनपता है फिर प्रेम भी

घृणा के उद्गम से

और इसी उद्गम से 

जन्म लेता है जीवन

हम और तुम भी

बस ऐसे ही चलता है सृष्टि का जीवन चक्र 

निराकार फिर साकार

आदि से अंत तक

~गौतम