उड़ेंगी उस क्षितिज तक

जिस क्षितिज तक सूर्य उगता है

बेटियों को वही उन्मुक्त सा

आकाश दे देना


निभा देंगी श्रवण के सदृश 

हर कर्तव्य बेटों के

जरा उन बेटियों को

प्रेम का आभास दे देना


बनेंगी छाँव पीपल सी 

बनेंगी आसरा हर दम

उन्हें कुलदीप सा रोशन

सुखद एहसास दे देना


तुम्हारे मान की खातिर 

सदा तत्पर रहेंगी वो

उन्हें संसार में आने का

बस वरदान दे देना


बड़ी निश्चल, बड़ी निःस्वार्थ 

उपवन की कली हैं वो

उन्हें विकसित कुसुम सा

बस वही सम्मान दे देना


~गौतम ✍️ @gautam0112